सबसे चिंता का विषय यह है कि हमारी जो मीडिया है वह निरपेक्ष नहीं ह। मीडिया निरपेक्ष कभी भी नहीं थी। पर उस पर एक लक्ष्मण रेखा या सीमा रेखा थी कि मीडिया किस हद तक अपने आप को सरकार या विरोधियों के साथ दिखा जाना पसंद करते थ। ऐसा कई बार हुआ है की कुछ मीडिया सरकार के साथ खड़ी है और उसके उलट कुछ मीडिया ऐसे भी हैं जो विरोधियों के साथ खड़े होते है। जब हम खड़े होकर किसी मीडिया ग्रुप को गोदी मीडिया या देशद्रोही मीडिया का टैग देते हैं तब हम भूल जाते हैं कि यह कितना भयंकर ह। असल में बात यह है की जैसे राजनीति एक व्यवसाय बन चुकी है उसी प्रकार मीडिया भी एक व्यवसाय बन चुका ह।
जहां पर टीआरपी बहुत ज्यादा मायने रखता ह। इसमें किसी भी पक्ष का सच समझ नहीं आता ह। .जैसे इस वीडियो में यह बताया जा रहा है कि कैसे सत्ताधारी पक्ष के नेता गण और देश के गृह मंत्री ने क्या बयान दिया था, पर इस वीडियो में इस बात को नजरअंदाज किया जा रहा है कि कुछ अलगाववादी तत्व के क्या बयान बाजी कर रहे थ। इस तरीके से एक मीडिया हाउस अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगने देते है। पर इन प्रश्न चिन्हों से इन मीडिया हाउस को कोई तकलीफ नहीं होती है, क्योंकि जब तक इनको टीआरपी और भी वरशिप ज्यादा मिले इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इनकी विश्वसनीयता पर कितने सवाल यह प्रश्न चिन्ह लगे है। इसका सिर्फ एक ही कारण है की पत्रकारों मीडिया हाउसों को कहीं पर भी जवाबदेही नहीं करनी पड़ती है। जब तक यह जवाबदेही की प्रक्रिया नहीं होगी मीडिया हाउसेस टीआरपी के पीछे भागती रहेगी ना कि सच्चाई के पीछेMonday, March 29, 2021
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